सीकर। आज की बदलती जीवनशैली में कमर दर्द एक आम समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोस्चर, शारीरिक गतिविधि की कमी, अचानक भारी वजन उठाना और उम्र के साथ रीढ़ में होने वाले बदलाव इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई मामलों में कमर दर्द कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन लगातार या पैरों तक फैलने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पलसानिया के अनुसार, कमर दर्द का कारण केवल मांसपेशियों में खिंचाव ही नहीं होता। कुछ मरीजों में डिस्क की समस्या, नस पर दबाव, उम्र से संबंधित रीढ़ के बदलाव या अन्य कारण भी हो सकते हैं।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
कमर में दर्द के साथ यदि दर्द पैर तक जाता है, झनझनाहट या सुन्नपन होता है, कमजोरी महसूस होती है या लंबे समय तक बैठने-खड़े रहने में परेशानी होती है, तो चिकित्सकीय जांच आवश्यक हो सकती है।
बचाव के लिए क्या करें?
नियमित रूप से सक्रिय रहें और लंबे समय तक लगातार न बैठें।
सही पोस्चर बनाए रखें।
डॉक्टर/फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से पीठ और कोर मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करें।
वजन उठाते समय सही तकनीक अपनाएं।
पर्याप्त नींद और संतुलित शारीरिक गतिविधि रखें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि कमर दर्द के साथ पैरों में बढ़ती कमजोरी, चलने में गंभीर परेशानी या पेशाब/मल पर नियंत्रण की समस्या हो, तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
डॉ. सुरेश पलसानिया ने बताया कि हर कमर दर्द में MRI या सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। उपचार का निर्णय मरीज के लक्षण, शारीरिक परीक्षण और जरूरत पड़ने पर जांच के आधार पर किया जाता है। समय पर सही निदान से अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है।

